
How to cultivate maize for green fodder in hindi: मक्का, जिसे मकई के रूप में भी जाना जाता है, अपने उच्च पोषण मूल्य और बहुमुखी प्रतिभा के कारण हरे चारे के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है। गाय, भेंस, बकरी और भेड़ जैसे पशुधन को मक्का का चारा न केवल स्वादिष्ट लगता है, बल्कि उनके समग्र स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। मक्का, एक बहुमुखी फसल है जो अपने पाक और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए जानी जाती है, पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे के रूप में भी बहुत मूल्यवान है।
इस लेख में, हम विशेष रूप से हरे चारे के उत्पादन के लिए मक्का की खेती की पेचीदगियों का पता लगाते हैं। सही मक्का किस्मों का चयन करने से लेकर खेती, सिंचाई और कीट प्रबंधन में सर्वोत्तम पद्धतियों को लागू करने तक, हम एक सफल मक्का चारा (Fodder Maize) फसल सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक चरणों और तकनीकों पर चर्चा करेंगे हैं। पशुधन पोषण और समग्र कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए एक स्थायी और मूल्यवान संसाधन के रूप में मक्का का उपयोग करने के लाभों को जानने के लिए सम्पूर्ण लेख को पढ़ें।
चारा मक्का के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable climate for fodder maize)
मक्का गर्म जलवायु की चारे की प्रमुख फसल है। चारा मक्का (Fodder Maize) की खेती समुद्र तल से 4000 मीटर ऊंचाई तक की जा सकती है। इसकी खेती 50-75 सेंमी समान वर्षा वाले क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है। उत्तरी भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से खरीफ मौसम में की जाती है। पौधों की सामान्य वृद्धि के लिए 30-32 डिग्री सेल्सियस तापमान उत्तम माना जाता है। पौधों की वृद्धि की शुरूआत में यह जलभराव के प्रति काफी संवदेनशील है। अत: शुरूआत में इसके खेत में जलभराव नहीं होना देना चाहिए।
चारा मक्का के लिए मृदा का चयन (Soil selection for fodder maize)
हमारे देश में चारा मक्का (Fodder Maize) की खेती लगभग सभी प्रकार की मृदा में की जाती है। इसके अधिक उत्पादन के लिए अच्छी जल निकास वाली उपजाऊ, गहरी दोमट एवं बलुई दोमट मृदा, जिसका पी-एच मान 6 से 7.5 और रासायनिक संरचना सामान्य हो, सर्वोत्तम मानी जाती है। मक्का के खेत में अधिक जलभराव एवं सूखाग्रस्त स्थिति इसके लिए हानिकारक मानी जाती है।
चारा मक्का के लिए खेत की तैयारी (Preparation of field for fodder maize)
हरे चारे के लिए मक्का (Fodder Maize) की बुआई हेतु एक बार मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करने के बाद दो बार विपरीत दिशा में हैरो या देसी हल चलाकर पाटे की सहायता से भूमि को समतल, भुरभुरा तथा खरपतवारों से रहित कर लेना चाहिए। चारा मक्का की बुआई के 15-20 दिन पहले 10-12 टन प्रति हैक्टर अच्छी गली – सड़ी गोबर की खाद डालकर मृदा में अच्छी तरह से मिला देनी चाहिए।
हरे चारे के लिए मक्का की किस्में (Varieties of Maize for Green Fodder)
हरे चारे के लिए मक्का (Fodder Maize) की अफ्रीकन टाल, जे 1006 और प्रताप चारा- 6 किस्में सबसे अच्छी मानी जाती है। यदि इन किस्मों का बीज न मिले तो संकर, गंगा- 11 या कम्पोजिट मक्का, किसान, विजय, मोती, वीएल- 54, एपीएफएम- 8की भी बुवाई कर सकते हैं। संकर मक्का के दि्वतीय पीढ़ी के बीज को भी चारे के लिए बोया जा सकता है।
चारा मक्का की बुआई का उचित समय (Proper time for sowing fodder maize)
शरद ऋतु को छोड़कर चारा मक्का (Fodder Maize) की खेती देश में वर्षभर की जाती है। सामान्यत: खरीफ ऋतु की फसल की बुआई जून-जुलाई में की जा सकती है। देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में रबी की फसल के रूप में मक्का की बुआई अक्टूबर-नवंबर में की जा सकती है। सिंचित क्षेत्रों में इसकी बुआई जायद की फसल के रूप में फरवरी के अन्तिम सप्ताह से मार्च के अन्तिम सप्ताह तक की जा सकती है।
चारा मक्का के बीजों का उपचार (Treatment of fodder corn seeds)
चारा मक्का (Fodder Maize) के बीज की बुआई बीजोपचार के पश्चात ही करनी चाहिए। मृदा तथा बीजजनित रोगों और कीटों से फसल को बचाने के लिए बीजोपचार एक अति आवश्यक प्रक्रिया है। बीज उपचार प्रक्रिया से बीजों का अंकुरण बढ़ता है। बीज उपचार करने के लिए सबसे पहले बीजों को फफूंदनाशी से उसके बाद कीटनाशी द्वारा तथा उसके बाद जैव उर्वरक द्वारा उपचारित करना चाहिए।
फफूंदनाशी के लिए 2-3 ग्राम कार्बेंडाजिम या थीरम दवा एवं कीटनाशी के रूप में इमिडाक्लोरोप्रिड 3-5 मिली दवा प्रति किग्रा बीज को उपचारित करने के लिए काम में लेना चाहिए। इसके 3-5 घंटे बाद जैव उर्वरक द्वारा बीजों को उपचारित करने के लिए तरल एजोस्पिरिलम कल्चर की 200 मिली मात्रा एक एकड़ क्षेत्र में लगने वाले बीजों के लिए करनी चाहिए। उपचारित बीजों को छाया में सुखाकर बुआई के लिए काम में ले सकते हैं। जैव उर्वरक 15-20 प्रतिशत तक उर्वरक नाइट्रोजन बचाते हैं।
चारा मक्का बीज की मात्रा और बुआई की विधि (Fodder corn seed quantity)
बीज की मात्रा: बीजदर मुख्यत: बीज की गुणवत्ता, बुआई का समय, बुआई की विधि तथा भूमि की अवस्था पर निर्भर करती है। आमतौर पर चारा मक्का (Fodder Maize) की बुआई के लिए 40-50 किग्रा बीजदर प्रति हैक्टर सिफारिश की गई है।
बुवाई का तरीका: इसकी बुआई मशीन (सीड ड्रिल) द्वारा पंक्तियों में करनी चाहिए, जहां पर पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-40 सेंमी, पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेंमी तथा गहराई 5-7 सेंमी रखी जानी चाहिए। बुआई के बाद समय-समय पर उर्वरक एवं सिंचाई देने व निराई-गुड़ाई करने में सुविधा के लिए खेत को क्यारियों में बांट देना चाहिए।
चारा मक्का के साथ अंत: फसलें (Intercropping with fodder maize)
चारा मक्का (Fodder Maize) के साथ अंत: फसल के रूप में लोबिया, ग्वार तथा राइसबीन की बुआई की जाती है, जिससे हरे चारे की उपज में बढ़ोतरी हो जाती है। मक्का के चारे के साथ दलहनी चारा मिलने से उसकी गुणवत्ता भी बढ़ जाती है।
चारा मक्का में खाद और उर्वरक प्रबंधन (Manure and fertilizer in fodder maize)
सामान्यत: पोषक तत्वों का प्रबंधन मृदा की पोषक तत्व परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर करना चाहिए। मृदा की पोषक तत्व परीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में सामान्यत: बुआई के 15-20 दिनों पूर्व 10-12 टन प्रति हैक्टर अच्छी गली – सड़ी गोबर की खाद डालकर मृदा में अच्छी तरह से मिला देनी चाहिए।
मक्का चारे (Fodder Maize) की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 80-100 किग्रा नाइट्रोजन, 40-50 किग्रा फॉस्फोरस एवं 40 किग्रा पोटाश प्रति हैक्टर तथा ऐसी मृदा, जिनमें जिंक की मात्रा कम (0.56 पीपीएम से कम) है, उनमें 20-25 किग्रा जिंक सल्फेट की मात्रा प्रति हैक्टर की दर से देनी चाहिए।
नाइट्रोजन की आधी मात्रा तथा फॉस्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा प्रारम्भिक खुराक के रूप में खेत की अंतिम जुताई के समय बुआई से पहले डालनी चाहिए। शेष बची हुई आधी नाइट्रोजन की मात्रा को फसल की ऊंचाई घुटनों तक होने की अवस्था में छिड़काव कर देना चाहिए।
चारा मक्का में सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management in Fodder Maize)
सिंचाई मृदा की स्थिति, चारा मक्का (Fodder Maize) फसल की किस्म एवं मौसम की स्थिति पर निर्भर करती है। सामान्यत: ग्रीष्म ऋतु में 5-6 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है, जो 10-12 दिनों के अंतराल पर दी जाती हैं। शरद ऋतु में 3-4 एवं वर्षा ऋतु में 1-2 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।
मक्का की फसल जलभराव के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। इसलिए अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। जिन क्षेत्रों में पानी का ठहराव 15 दिनों से अधिक होता है, वहां मक्का को मेड़ के ऊपर लगाना चाहिए।
चारा मक्का में खरपतवार प्रबधंन (Weed Management in Fodder Maize)
चारा मक्का (Fodder Maize) की फसल में खरपतवार प्रबंधन एक महत्वपूर्ण सस्य क्रिया है। प्रारंभिक 30-40 दिनों तक फसल को खरपतवारों से रहित रखने से फसल की वृद्धि, विकास एवं गुणवत्ता बढ़ोतरी होती है। इससे फसल तथा खरपतवारों के बीच पानी, कार्बनडाइऑक्साइड, सूर्य के प्रकाश एवं पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा होती है।
फसल की प्रारंभिक अवस्था में खरपतवारों का नियंत्रण करने के लिए एट्राजीन शाकनाशी 0.75-1.0 किग्रा सक्रिय तत्व को 400 से 600 लीटर पानी में घोलकर बुआई के 1-2 दिन बाद प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करें तथा उसके पश्चात अगर खेत में कोई खरपतवार उग आये, तो उसे वीडर कम मल्चर की सहायता से निराई-गुड़ाई करके नियंत्रित कर सकते हैं।
यदि मक्का के साथ मिश्रित या अंत:फसल के रूप में दलहनी फसलों को बोया गया है, तो एट्राजीन के स्थान पर पेन्डीमेथालिन (30 ईसी) या एलाक्लोर शाकनाशी 1.0 किग्रा सक्रिय तत्व का बुआई के 1-2 दिन बाद प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करें।
चारा मक्का में रोग और कीट नियंत्रण (Disease and pest control in fodder corn)
मक्का में डाउनी मिल्ड्यू की समस्या आमतौर देखी जाती है। इसके नियंत्रण के लिए बीजों का 2 ग्राम प्रति किग्रा थीरम कवकनाशी से बीजोपचार करके बुआई करें। चारा मक्का (Fodder Maize) की फसल में मुख्य रूप से तनाछेदक कीट का प्रकोप पाया जाता है। इसके कारण पौधों का शीर्ष भाग सूख जाने से वृद्धि रुक जाती है। इसकी रोकथाम के लिए 0.02 प्रतिशत इमिडाक्लोप्रिड कीटनाशक दवा के घोल को 400-500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से इसकी रोकथाम हो जाती है।
इसके प्रयोग के बाद 20-25 दिनों तक हरे चारे को पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए। यदि तनाछेदक कीट फसल की कटाई अवस्था में मौजूद हो, तो इसे उचित अवस्था आने से पहले ही काट लेना चाहिए। जहां तक हो सके चारे की फसलों में कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कम से कम व अत्यन्त सावधानीपूर्वक करना चाहिए। इनके अवशेष चारे में बचे रहने के कारण इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
चारा मक्का की कटाई और उपज (Harvesting and yield of fodder maize)
कटाई: चारा मक्का की कटाई केवल एक बार ही की जाती है। इसमें पुनर्वृद्धि की क्षमता नहीं पायी जाती है। मक्का की कटाई जल्दी करने से चारे की गुणवत्ता अच्छी मिलती है और उपज कम प्राप्त होती है। हालांकि देरी से कटाई करने पर उपज ज्यादा व गुणवत्ता कम हो जाती है। इसलिए, हरे चारे की अधिक गुणवत्ता एवं उपज के लिए मक्का की कटाई बुआई के 65-70 दिनों बाद 50 प्रतिशत पुष्पण अवस्था से लेकर दाने की दूधिया अवस्था तक करनी चाहिए।
पैदावार: अच्छे प्रबंधन द्वारा चारा मक्का (Fodder Maize) से 400-600 क्विंटल प्रति हैक्टर हरे चारे की उपज प्राप्त की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न? (FAQs)
चारा मक्का (Fodder Maize) की खेती के लिए, अच्छी जल निकासी वाली, दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। बुवाई के लिए फरवरी-मार्च का समय अच्छा होता है, और 16 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है। इसकी बुआई पंक्तियों में करनी चाहिए, जहां पर पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-40 सेंमी, पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेंमी तथा गहराई 5-7 सेंमी रखी जानी चाहिए।
चारा मक्का (Fodder Maize) की खेती, खासकर गर्मियों में जब अन्य चारे की फसलें उपलब्ध नहीं होती, एक महत्वपूर्ण विकल्प है। हालाँकि चारे के लिए मक्का की खेती, गर्मी, बरसात और सर्दियों के मौसम में की जा सकती है।
हरे चारे के लिए मक्का (Fodder Maize) की बुवाई फरवरी के अंत से मार्च के पहले सप्ताह के बीच कर सकते हैं, या फिर जून-जुलाई में खरीफ मौसम में भी बुवाई कर सकते हैं।
चारा मक्का (Fodder Maize) की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 40-50 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है, जबकि प्रति एकड़ 16 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है।
हरे चारे के लिए मक्का (Fodder Maize) की अच्छी किस्मों में अफ्रीकन टाल, प्रताप मक्का- 6, गंगा- 2, गंगा- 5, जे- 1006, गंगा- 6, गंगा- 7 और पूसा फोरेज मक्का हाइब्रिड (AFH-7) शामिल हैं।
हरे चारे के लिए मक्का (Fodder Maize) की बुवाई हेतु खेत की अच्छी तरह तैयारी करें, बीज को 25-30 सेमी की दूरी पर कतारों में बोएं, और बीज की गहराई 5-6 सेमी रखें। बुवाई का समय फरवरी-मार्च में सबसे उपयुक्त होता है।
चारा मक्का (Fodder Maize) की सिंचाई, खासकर गर्मियों में, बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली सिंचाई हल्की करें, और फिर 15-20 दिनों के अंतराल पर दूसरी और तीसरी सिंचाई करें ताकि फसल को उचित नमी मिले और अच्छी पैदावार हो।
चारा मक्का (Fodder Maize) के लिए, बुआई से पहले खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालें, साथ ही नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट जैसे उर्वरकों का उपयोग करें।
हरे चारे के लिए मक्का (Fodder Maize) की कटाई, बुवाई के 50-60 दिन बाद, जब मक्का में 50% फूल आ जाएं, तब करनी चाहिए।
चारा मक्का (Fodder Maize) से प्रति हेक्टेयर 40 से 60 टन तक हरा चारा प्राप्त होता है, जो पशुओं के लिए पौष्टिक होता है।
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